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बिलसंडा रासलीला: वासुदेव ने पार की उफनती यमुना, श्रीकृष्ण के चरण स्पर्श कर धन्य हुईं यमुना मैया
बिलसंडा: कस्बा स्थित रामलीला मैदान में आयोजित की जा रही भव्य रासलीला में कल रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के उपरांत “यमुना पार” करने की अलौकिक लीला का मंचन किया गया। इस भावुक और दिव्य प्रसंग को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
ब्रज के सुप्रसिद्ध रासाचार्यों के कुशल निर्देशन में कलाकारों ने इस प्रसंग को जीवंत कर दिया। मंच पर दिखाए गए दृश्यों में जब कंस के कारागार से वासुदेव जी शिशु रूप में भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी में रखकर गोकुल के लिए निकलते हैं, तो मार्ग में उफनती हुई यमुना नदी उनके सामने आ जाती है।
अलौकिक रहा यमुना जी के चरण स्पर्श का दृश्य
जैसा कि मंच पर नीली लहरों के रूप में यमुना जी का सुंदर दृश्य तैयार किया गया था, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार इस पावन लीला को दर्शा रहे हैं। जैसे-जैसे वासुदेव आगे बढ़ते हैं, यमुना का जलस्तर बढ़ने लगता है।
तभी टोकरी से पैर निकालकर जैसे ही बाल-कृष्ण ने यमुना मैया का स्पर्श किया, वैसे ही यमुना जी का वेग शांत हो गया और उन्होंने वासुदेव जी को सुरक्षित मार्ग दे दिया। इस मनमोहक दृश्य को देखकर पूरा पंडाल ‘जय श्री कृष्णा’ के जयकारों से गूंज उठा।
गोकुल में मची धूम
इसके बाद की लीला में, जब वासुदेव जी कान्हा को नंद भवन पहुँचा देते हैं, तो गोकुल में भगवान के आगमन पर भारी उत्सव मनाया जाता है। जैसा कि भगवान के मनमोहक स्वरूप के दर्शन होते हैं, उसी प्रकार मंच पर नंद बाबा और ग्वाल-बालों में पीले वस्त्रों में सजे कलाकारों द्वारा संवाद करते देखा जा सकता है के बीच हास-परिहास और बधाई गीतों का दौर चला। ग्वाल-बालों ने आपस में हंसी-मजाक करते हुए ठाकुर जी के जन्म की खुशियां मनाईं।
भक्त हुए भाव-विभोर
इस पावन संध्या में सुर, संगीत और संवाद के अद्भुत तालमेल ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में ठाकुर जी की भव्य महाआरती उतारी गई और उपस्थित भक्तों में माखन-मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक समिति ने सभी क्षेत्रवासियों से आगे की लीलाओं (माखन चोरी, गोवर्धन लीला और महारास) का आनंद लेने के लिए सपरिवार पधारने का अनुरोध किया है।
रिपोर्टर : प्रियम तिवारी ( जिला क्राइम रिपोर्टर पीलीभीत) पत्रकार प्रेस ऑफ़ इंडिया मंडल अध्यक्ष बरेली
चैनल: लोक विचार न्यूज़







