

खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध, आने से पहले ही होटल संचालकों तक पहुँच जाती है सूचना!
लोक विचार न्यूज़ संवाददाता मुकेश शर्मा
**लखीमपुर-खीरी।** संसारपुर क्षेत्र में एक शिकायत पर निरीक्षण करने पहुँचे खाद्य सुरक्षा अधिकारी (FSI) रमेश सिंह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि अधिकारी महोदय औचक रूप से पहुँचने के बजाय, अपने ही सूत्रों से अपने आने की खबर ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों तक पहले ही पहुँचा देते हैं, जिससे मिलावटखोर सतर्क हो जाते हैं।
### 🚨 आने की सूचना पहले ही लीक
संसारपुर में रॉयल रेस्टोरेंट और दिल्ली दरबार बिरयानी के खिलाफ प्रतिबंधित तेल व बासी मांस बेचने की आईजीआरएस (IGRS) शिकायत पर विभाग को पूरी गोपनीयता बरतनी चाहिए थी। परंतु, स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी के आने की खबर पहले ही लीक हो चुकी थी। नतीजतन, जब अधिकारी मौके पर पहुँचे तो संचालक को अपनी कमियां छुपाने का पूरा समय मिल गया। आख्या रिपोर्ट में भी चालाकी से दर्ज कर दिया गया कि उनके पहुँचने के वक्त नॉन-वेज का विक्रय ही नहीं हो रहा था।
### 🔬 तेल जाँच (DOM-24) में बड़ा खेल
अधिकारी द्वारा आने की खबर पहले पहुँचाने के बावजूद होटल संचालक की एक बड़ी लापरवाही पकड़ी गई। मौके पर जब कड़ाही में मौजूद तेल को पहली बार **DOM-24 (TPC Meter)** यंत्र से मापा गया, तो उसका पैमाना मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए **40%** आया, जो कि पूरी तरह प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए जानलेवा श्रेणी में है।
लेकिन खेल यहीं खत्म नहीं हुआ; कड़ाही के तेल का पैमाना 40% आते ही अधिकारी ने वैधानिक कार्रवाई करने के बजाय आरोपी दुकानदार को बचाने का नया पैंतरा निकाला। अधिकारी ने उस मशीन (यंत्र) को साफ करवाया और पीपे से नया रिफाइंड तेल मंगवाया। इसके बाद शातिर तरीके से मशीन को पहले नए रिफाइंड तेल के पीपे में डुबोया गया और फिर कड़ाही में भरे तेल में डुबोया गया। इस सोची-समझी हेराफेरी के बाद जब रीडिंग ली गई, तब जाकर पैमाना 23% पर आया, जो सीधे तौर पर अधिकारी की मिलीभगत और जालसाजी को उजागर करता है।
### 📞 फोन पर बोले इंस्पेक्टर: “हमारे अपने सूत्र हैं”
जब इस पूरे घटनाक्रम की भनक स्थानीय पत्रकार को लगी, तो उन्होंने सीधे खाद्य सुरक्षा अधिकारी रमेश सिंह से फोन पर संपर्क किया। पत्रकार द्वारा यह पूछे जाने पर कि *’आखिर आपके आने की खबर ढाबा संचालकों को पहले ही कैसे मिल गई?’*, तो इंस्पेक्टर महोदय ने इसे घुमाते हुए स्वीकार कर लिया।
> **फोन पर हुई बातचीत में इंस्पेक्टर रमेश सिंह ने सीधे शब्दों में कहा— “हमारे अपने सूत्र होते हैं, हम अपने सूत्रों से पता करवाते हैं।”**
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अधिकारी का यह गैर-जिम्मेदाराना बयान अब चर्चा का विषय बन गया है कि यदि विभाग के अधिकारी खुद अपने “सूत्रों” के माध्यम से मिलावटखोरों तक आने की खबर पहुँचा देंगे, तो जनता के स्वास्थ्य की रक्षा कैसे होगी?
### ❓ उच्च स्तरीय जाँच की मांग
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और शिकायतकर्ता का कहना है कि ऐसी ‘मैनेज्ड’ जाँच आख्याओं के दम पर मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। मौके पर महज खानापूर्ति करके, साठगांठ करके और शिकायतकर्ता के दस्तखत लेकर मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
क्षेत्र की जनता ने लखीमपुर-खीरी के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी और जिलाधिकारी (DM) से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण और अधिकारी की संदिग्ध भूमिका की किसी उच्च स्तरीय टीम से निष्पक्ष जाँच कराई जाए।



