

लखीमपुर खीरी: सरकारी दावों पर भारी पड़े दबंग, अनाथ-लाचार पीड़िता से हैवानियत के बाद मामला दबाने की कोशिश
लोक विचार न्यूज़ पीयूष दीक्षित ब्यूरो चीफ लखीमपुर खीरी:
एक तरफ जहां प्रदेश की योगी सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘मिशन शक्ति’ जैसे नारों के जरिए महिलाओं व बेटियों की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर समाज में बैठे राक्षस मासूमों को अपनी हैवानियत का शिकार बना रहे हैं। जिला लखीमपुर खीरी के थाना हैदराबाद अंतर्गत चौकी क्षेत्र अजान से इंसानियत को तार-तार कर देने वाला एक अत्यंत शर्मसार और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बेबसी और गरीबी का फायदा उठाकर एक नाबालिग बच्ची की जिंदगी बर्बाद कर दी गई।
गन्ने के खेत में खींचकर किया दुराचार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अजान चौकी क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली अत्यंत गरीब परिवार की नाबालिग बच्ची जब शौच के लिए गई थी, तभी गांव के ही 55 वर्षीय एक अधेड़ व्यक्ति ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर उसे जबरन गन्ने के खेत में पकड़ लिया। दबंगों ने डरा-धमकाकर मासूम के साथ सामूहिक दुराचार किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
4 महीने बाद खुला पेट में गर्भ ठहरने का राज
इस खौफनाक वारदात का खुलासा तब हुआ जब नाबालिग के पेट में गर्भ रुक गया। घटना के 4 महीने बीत जाने के बाद जब परिजनों को बच्ची के गर्भवती होने की जानकारी हुई, तो उनके होश उड़ गए। पीड़िता का कहना है कि आरोपी पक्ष मामले को दबाने के लिए उसे आशा बहू आदि के माध्यम से अस्पताल लेकर गर्भपात कराने पहुंचे थे, लेकिन चिकित्सकों के स्पष्ट इनकार के कारण वे अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके।
बेहद दयनीय है परिवार का हाल, गरीबी का उठाया फायदा
पीड़िता का परिवार दाने-दाने को मोहताज और अत्यंत दयनीय हालत में रह रहा है। घर के नाम पर महज छप्पर और फूस की टटियां खड़ी हैं। मासूम की मां का साया पहले ही सिर से उठ चुका है। पिता पेट पालने के लिए बाहर रहकर नौकरी करते हैं। घर में केवल एक बुजुर्ग दादी हैं, जिन्हें आंखों से कम दिखाई और कानों से कम सुनाई देता है, साथ ही एक छोटा भाई है जो विकलांग है। इसी लाचारी और अनाथपन का फायदा उठाकर गांव के रसूखदारों ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
मामला दबाने में जुटे रसूखदार, पुलिस तक नहीं पहुंचा मामला
चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मामला अभी तक पुलिस के संज्ञान में नहीं पहुंचा है। पीड़िता के पिता बाहर गए हुए हैं और परिजनों का कहना है कि उनके वापस लौटने पर ही थाने जाकर औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। उधर, आरोपी पक्ष अपनी पहुंच और रुपयों की साठ-गांठ के बल पर मामले को रफा-दफा करने और दबाने की लगातार कोशिश कर रहा है।
संस्थाओं और महिला आयोग से त्वरित संज्ञान की मांग
इतनी कम उम्र और मासूमियत में इस भयावह मंजर से गुजरने वाली इस बेबस बच्ची का अब सहारा कौन बनेगा? समाज का कहना है कि इस गंभीर प्रकरण में बाल संरक्षण संस्था (Child Rights Protection/CWC/चाइल्डलाइन) और राष्ट्रीय व राज्य महिला आयोग (NCW/SCW) को तत्काल स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेना चाहिए।
स्थानीय जनता और समाजसेवी संगठनों ने मांग की है कि पुलिस प्रशासन बिना किसी दबाव के आरोपियों पर पोक्सो (POCSO) एक्ट सहित कड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजे, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और समाज में बैठे ऐसे दरिंदों को कड़ा सबक सिखाया जा सके।



