24×7 Breaking News | Latest Updates

Patrkar Press of India
National President
Mr. Vivek Kumar

Head Office:
Model City Mohan Road,
New Airtel Tower, Tower Wali Gali,
Buddheshwar, Lucknow – 226017

Logo
श्रीरामपुरवा (सुजौली) में वन अधिकार आंदोलन की बैठक: 2027 से पहले सभी वन बस्तियों को राजस्व ग्राम बनाने की उठी मांग $location = get_post_meta(get_the_ID(), 'post_location', true); ?> 📍 Unknown | September 10, 2026

श्रीरामपुरवा (सुजौली) में वन अधिकार आंदोलन की बैठक: 2027 से पहले सभी वन बस्तियों को राजस्व ग्राम बनाने की उठी मांग

लोक विचार न्यूज़ जिला ब्यूरो चीफ

​बहराइच:जनपद बहराइच के मोतीपुर (मिहिनपुरवा) तहसील अंतर्गत वन बस्ती ग्राम श्रीरामपुरवा (सुजौली) में 10 सितंबर 2026 को वन अधिकार आंदोलन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बिशंबर प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही।

​बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह तत्पर है और इस कार्य में क्षेत्रीय विधायक का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पूर्व ही इन सभी वन बस्ती ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करा लिया जाएगा। जंग हिंदुस्तानी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में अब तक 54 गांव राजस्व ग्राम की श्रेणी में आ चुके हैं तथा सरकार सभी वन बस्तियों, पुरातन आवासों और असर्वेक्षित वन ग्रामों का संज्ञान लेकर उन्हें राजस्व ग्राम बनाने का ऐतिहासिक कार्य कर रही है।

​बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे ग्रामीण

बैठक के दौरान वन अधिकार आंदोलन के कार्यकर्ता मोहन ने गांव की गंभीर समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्रीरामपुरवा के वन ग्राम से राजस्व ग्राम में परिवर्तित न होने के कारण गांव में पक्के रास्तों का निर्माण नहीं हो पा रहा है, जिससे बच्चों की स्कूल की पढ़ाई बाधित हो रही है। इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं गांव तक नहीं पहुंच पा रही हैं और वृद्धों, विधवाओं तथा दिव्यांगों को पेंशन योजना का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक इस गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलता, तब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

​प्रशासनिक उदासीनता पर जताई चिंता

वन अधिकार आंदोलन के महासचिव रघुवीर ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार उनकी मांगों को सुनना और समझना चाहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कर्मचारी जनसमस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक सुस्ती पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए अब एक बड़े और एकजुट आंदोलन की आवश्यकता है।